कोई तो लौटा दो वो पुराने दिन ।।।
पापा की उंगली पकड़कर चलना
माँ की बाहों में लिपटकर रोना
जवानी के समुन्द्र में बचपन की यादें गयी छिन
कोई तो लौटा दो वो पुराने दिन
पोषम पा, कटी पतंग कितने खेलो का साथ था
कितना खुशहाल ओर रंगीन बचपन हमारे पास था
समय के पहिये के आगे बचपन की साईकल गयी छिन
कोई तो लौटा दो वो पुराने दिन
जब सारे गलियों में खेला करते थे
बच्चे सब मिलकर एक दूसरे के दुख झेला करते थे
इस मोबाइल की दुनिया ने तो सब कुछ लिया छीन
कोई तो लौटा दो वो पुराने दिन
टी वी पर अच्छी बातें सिखाने के लिए एक शक्तिमान होता था
ब्लैक एंड वाइट टी वी ओर 2 चैनल पर भी अभिमान होता था
पिज़्ज़ा बर्गर के लिए रोटी गयी छिन
कोई तो लौटा दो वो पुराने दिन।।
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